नायिका

                              नायिका   
        "तुम्हारी अनुपस्थिति मेरे जीवन का सबसे बड़ा अभाव रहेगी। जब झाँक के देखता हूँ अतीत के पन्नो को तो तुम्हारा अस्तित्व साफ़ नज़र आता है, तुम्हारा मुझमें मुझसे ज़्यादा होना महसूस होता है और ख़ुद अस्तित्वहीन होने का आभास होता है।
        ऐसा लगने लगता है कि तुम हमेशा से इस कहानी की नायिका रही हो। अद्वितीय, निडर, निश्छल, छंद या किसी लय सी लड़की, जो अपने किरदार को बख़ूबी निभा रही हो और संघर्ष कर रही हो अपने प्रेम को पाने के लिए।
           कहते है की स्त्री हमेशा से अलग अलग तरीको से प्रेम को व्यक्त करती है और पुरुष उसी प्रेम को सिद्ध करता है। पर यहाँ व्यक्त और सिद्ध तुमने ही किया। तुमने ही कहानी को नया आयाम दिया। उसमें नए रंग भरे। सिर्फ़ तुम ही चाहती थी की यहाँ प्रेम विजय हो। और मैं अव्यक्त सा अपने ही आप मैं खोया रहा। तुम्हारे प्रेम को देख कर भी अनदेखा करता रहा। और सोचता रहा की यहाँ प्रेम विजय होना ही नहीं चाहता।
           पर तुम डटी रही अंतिम समय तक...अकेले ही खिंचती रही वो डोर जिसका एक सिरा मेरे हाथ मैं था। अगर थोड़ा और ज़ोर लगाता तो शायद इस कहानी का अंत कुछ और ही होता। पर ये हो ना सका...
            आज ये सोचता हूँ की शायद अगर व्यक्त हो पाता तुम्हारे सामने और सिद्ध कर पाता अपने प्रेम को, तो सबकुछ पाने के आनंद से ज़्यादा  बोहत कुछ खोने की व्यथा साथ ना होती। अब ये व्यथा जीवनभर मेरे साथ रहेगी और चुभती रहेगी उस डोर की तरह हाथो में मेरे, जैसे तुम्हारे चुभी थी अकेले खिंचते हुवे...।"
                                                        -अभि

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