किरदार...

                               
किरदार

              कोने में पड़ी हुवी मेरी डायरी में आज भी कई कहानियां कैद है। उन्ही कहानियोमेसे एक किरदार जो मैंने बड़ी सहेजता से और उन्मुक्त होके लिखा था। उसी किरदार को जीने का मन कर रहा है।
             वो किरदार जिसे आप हर कहानी मे जिंदा रखना चाहते हो। आप चाहते हो कि वो कभी ना हारे, ना कभी अपने ध्येय से विलग हो। आप चाहते है उससे वही दृढ संकल्प जो अभिमन्यु के मृत्यु पश्चात अर्जुन ने किया था। वही जो हमेशासे ही प्रेरणादायी हो। हा वही किरदार आज मैं जीना चाहता हु। क्योंकि कुछ टूट गया है अंदर और बिखरने लगा है यह वहां..और कमजोर कर रहा है मुझे...संजोने की कोशिश मैं लगा रहता हूं हर बार पर नही हो रहा।शायद वही मुझे इस वेदना से बाहर निकलेगा।
              ज्ञात है मुझे कठिन है उसे निभाना पर उसे उतारना होगा अपने भीतर जैसे कोई पौधा उतारता है अपने भीतर वर्षा की हर बूंद को। यहा मैं अपनो से ही हारा  हुवा हुँ.. शायद हारना निश्चित ही था..लढाई जो अपनो से थी। इसीलिए अब वो कृष्ण बनके खड़ा रहेगा मेरे भीतर,मेरे साथ...और शायद वही है जो लड़ सकता है अंतिम समय तक और तार सकता है मुझे।

Comments

  1. Wow!!!! 👏👏 for your "kirdar" .

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  2. Still you have that motivation inside you.. because you are the motivation for people who really cares about you. N I really want " tum jio hajaro saal with that spirit and motivation. To motivate me n to motivate your followers.

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