इन्तेजार
इन्तेजार...
"आज थोड़ीसी आस लगाये बैठी होगी...
सुबह की चाय आज उसने मेरीे यादो के संग देर तलक उबाली होगी...
जैसे चाय के साथ हर लम्हा पका लेना चाहती हो...
बेचैनियां जरूर होंगी..पर उससे ज्यादा उसकी खुशी झलकेगी उसके बने हुवे खाने से आज..
जो शायद मन कि रसोई में वो कबसे मेरे लिएे ही पका रही थी...
दहलीज से बाहर झांकती उसकी आंखें
आज हर आहट को पहचानती होगी...
नही...नही...हर आहट मे मुझको ढूंढती होगी...
सहमिसी थोड़ी, उम्मीदे लगाए...
उन पलों को जरूर चुनती होगी...
मेरी माँ आज मेरी राह देखती होगी...
मेरी माँ आज मेरी राह देखती होगी..."
"आज थोड़ीसी आस लगाये बैठी होगी...
सुबह की चाय आज उसने मेरीे यादो के संग देर तलक उबाली होगी...
जैसे चाय के साथ हर लम्हा पका लेना चाहती हो...
बेचैनियां जरूर होंगी..पर उससे ज्यादा उसकी खुशी झलकेगी उसके बने हुवे खाने से आज..
जो शायद मन कि रसोई में वो कबसे मेरे लिएे ही पका रही थी...
दहलीज से बाहर झांकती उसकी आंखें
आज हर आहट को पहचानती होगी...
नही...नही...हर आहट मे मुझको ढूंढती होगी...
सहमिसी थोड़ी, उम्मीदे लगाए...
उन पलों को जरूर चुनती होगी...
मेरी माँ आज मेरी राह देखती होगी...
मेरी माँ आज मेरी राह देखती होगी..."
👌👌👌👌👌
ReplyDeleteThank you
Delete