कोन है तू...
कोन है तू...
जो समझ नही आ रही है मुझे...
मैं हिन्दू कहू खुदको तो तू
कुरान है शायद...
किसी दूसरी भाषा मे लिखी हुवी किताब
है शायद...
कोन है तू...
एक सीधी साधी लड़की कहू तो तू किसी
हूर जैसी दिखती है...
और अगर परी कहू तुझे तो तू
इस जमी की ही लगती है...
कोन है तू...
धूप मैं कोई छाव जैसी..
शांत, अंधेरी रात जैसी..
जलती हुवी किसी लो जैसी..
या झरोखे से झांकती हुवी किरण जैसी..
कोन है तू...
काटो में लिपटा गुलाब हो...
या सुर्ख सर्दीवाली रात हो...
चमचमाता कोई सितारा...
या नीले समंदर का आखरी किनारा...
कोन है तू...
जो समझ नही आ रही...
को है तू...

Mst ahe.. !!
ReplyDeleteKhup chhan ahe abhi.... Mast....
ReplyDeleteKhupach chan...Abi
ReplyDeleteWhoa...nice one👌
ReplyDelete👌👌👍..
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